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सफलता के सूत्र

शरीरिक भाषा, परिधान और लोक व्यवहार


सफलता के लिए हर कोई लालायित रहता है, मगर यह किसी-किसी को ही नसीब होती है। इसके कारण अनेक हैं मगर मैं यहाँ तीन प्रमुख भौतिक कारणों पर प्रकाश डालना चाहता हूँ जो आप को सफलता की ओर ले जाते हैं। वे कारण हैं …… शारीरिक भाषा, परिधान लोक व्यवहार कहते हैं कि किसी के मिलने पर जो पहला प्रभाव पड़ता है, वह काफी गहरा एव स्थाई होता है। इसमें हमारी शारीरिक भाषा का बड़ा महत्वपूर्ण योगदान होता है। चेहरे पर मुस्कान बनी रहे, कंधे समतल हो और रीढ़ सीधी हो तो लोग आपकी तरफ आकर्षित होते हैं। बात करते समय हाथ खुले हों आप सामने की ओर थोडे से झुकें हों तो सामने वाले को लगता है कि ‘आप उसमें रुचि ले रहे हैं। महिलाओं से बात करते समय नज़रें ठोड़ी से ऊपर हो तो यह सम्मान सूचक माना जाता है। इसी प्रकार परिधान भी अगर अवसरानुकूल हो, स्वच्छ हो तथा सही नाप का हो तो भी प्रभाव सकारातमक होता है। किसी से मिलने पर उसका कुशल क्षेम पूछना, परिवार की कुशलता की कामना करना और अपने से पहले सामने वाले को आसन देना विनम्रता मानी मानी जाती है। ऐसा करके हम सामने वाले की नजरों में सज्जन बन जाते हैं। बात चीत के दौरान ज़्यादा ध्यान से सुनना ताकि समझ न कि जवाब दे सके। किसी की बात से अगर इत्तफाक नहीं रखते तो भी बड़ी विनम्रता पूर्वक ही अपनी बात कहकर यह जताना कि ऐसा सिर्फ आपका विचार है सच्चाई कुछ भी हो सकती है। इसके अलावा वाणी में मधुरता होनी चहिए। कबीर दास कहते हैं “मृदुल वचन है औषधि कटुत वचन है तीर, श्रवण द्वार होई संचरे साले सकल शरीर। वाणी की मृदुलता एक प्रकार का मंत्र है जिससे किसी को भी वश में किया जा सकता है।इस लिए लोक व्यवहार में सफ़लता के लिए मधुर भाषी होने का अभ्यासी होना चाहिए।

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शारीरिक भाषा, परिधान एवं व्यवहार ही सफलता सुनिश्चित करते हैं ऐसा नहीं है। हां! इतना ज़रूर है कि सधी हुई लोक व्यवहार की ये बातें आपको सफ़लता के थोड़े निकट जरूर ले जाती है, आप के लिए एक राह बनाती है और आप के लिए अनुकूलता पैदा करती है। सबसे खास बात तो यह है कि ऐसा करने से हमारा व्यक्तित्व आकर्षक हो जाता है जिसका सफ़लता प्राप्त करने में बडी भूमिका होती है।

 
 
 

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