सफलता कैसे मिले…?
- Ajay Dubey
- Feb 2, 2023
- 2 min read
जीवन में सफलता तो हर कोई प्राप्त करना चाहता है, मगर यह मिलती किसी किसी को है। क्या हमने कभी इसके कारण को टटोलने की कोशिश की?... नहीं ! क्योंकि हम तो अपनी असफलता के लिए भाग्य को भगवान को और संबंधित लोगों को जिम्मेदार ठहरा कर अपने कर्तव्य की इतिश्री समझ लेते हैं और हाथ पर हाथ रखे इंतजार करते रहते हैं कि 1 दिन मेरा भाग्य उदित होगा, एक न एक दिन भगवान का सिंहासन डोलेगा और लोग मेरे पक्ष में हो ही जाएंगे। परंतु सच्चाई तो यह है कि ऐसा कभी नहीं होगा…. और आप अभाव, असफलता, अज्ञानता व अस्वस्थता के बंधन में बंधे अपना वह मूल्यवान जीवन बर्बाद कर देंगे जिसे किसी खास मकसद से परमात्मा ने बड़ी शिद्दत से गढ़ा था।…तो क्या आप जानना चाहते हैं कि सफलता कैसे मिले?... इसके लिए पहली और अंतिम एक ही शर्त है जिसे कहते हैं “जिम्मेदारी”….। अपने चारों ओर नजरें उठा कर देखिए ध्यान से तो पाएंगे कि सफल वही है जिसने खुद के प्रति परिवार के प्रति माता पिता के प्रति परिजन पुरजन के प्रति, समाज के प्रति व राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी निभाई है। वास्तव में इस जिम्मेदारी का एहसास आपसे वह सब काम करवाता है जिससे सफलता की बुनियाद तैयार होती है। यह जिम्मेदारी ही है जो आपको अनुशासित और नियमित बनाती है।

अनुशासित जीवन जीने वाले व्यक्ति की सारी की सारी ऊर्जा एक जगह केंद्रित होकर लगती है जिससे कर्म की गुणवत्ता बहुत अच्छी हो जाती है। कर्म, कर्मठता और जिम्मेदारी का एहसास आपस में मिलकर जब आपकी सोच और दिनचर्या का संचालन करते हैं तब सफलता आपको खोजती हुई आपके चरण वंदन के लिए आपके दरवाजे पर खड़ी नजर आती है। याद रखने लायक बात है कि जो लोग दूसरों के प्रति जिम्मेदारी की अनुभूति के बिना काम करते हैं…. असफलता उन्हें ही अपना शिकार बनाती है। जो व्यक्ति यह जानता है कि मंजिल या जीवन का लक्ष्य प्राप्त करने पर अपार सुख शांति , आनंद और संतुष्टि मिलती है वह व्यक्ति मंजिल की राह में आने वाली सारी बाधाओं को हंसते-हंसते झेल लेता है। हर संकट और कष्ट को सह लेता है। उसे पता होता है कि मंजिल प्राप्त करने के सुख के सामने मार्ग की बाधाओं का कष्ट कुछ नहीं है। ऐसा व्यक्ति ही इतिहास बनाता है और दुनिया उससे प्रेरणा लेती है। सफलता का मूल आपके अंदर छिपा है आपके अंदर जिम्मेदारियों को निभाने की आग जितनी प्रखर होगी मंजिल तक पहुंचने की छटपटाहट जितनी अधिक होगी सफलता उतनी ही निकट होगी।

तो आइए जीवन में सफल होने के लिए वादा करें कि खुद के प्रति परिवार, समाज व राष्ट्र के प्रति जिम्मेदार बनेंगे। कहते हैं समाज उन लोगों की नकल करता है जो बड़े होते हैं अर्थात सफल होते हैं। सफल बन कर आप अपना ही नहीं समाज का भी कल्याण करते हैं क्योंकि समाज आपकी नकल करता है और वह भी सफल होता है। इस प्रकार सफलता की एक श्रृंखला शुरू हो जाती है।
.png)



Comments