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स्मार्टफोन और बच्चों का भविष्य

विज्ञान और तकनीकि की सहायता से मनुष्य ने नई-नई सफलताओं के झंडे गाड़े हैं। स्मार्टफोन विज्ञान की एक ऐसी ही खोज है जिसका असर मानव जीवन के हर क्षेत्र पर पड़ रहा है। इसके प्रभाव से सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं बच्चे जो समाज का भविष्य है।


स्मार्टफोन के अत्याधुनिक फीचर्स और उससे जुड़ा हुआ इंटरनेट कनेक्शन का मतलब है कि पूरी दुनिया की खिड़की आपके सामने खुल चुकी है। इस खिड़की से आप कुछ भी झांक सकते हैं। यह आप पर निर्भर करता है कि आप अच्छा देखते हैं खोजते हैं या बुरा। चलती फिरती तस्वीरों का जादू कुछ ऐसा असर डालता है कि बच्चे तो क्या बड़े भी सुध बुध खो बैठते हैं। स्मार्टफोन के जादुई आकर्षण से बचना आज सबसे बड़ी चुनौती बन गई है। मैदान के खेलों को भूल बच्चे इसी से चिपक गए हैं जिसके कारण उनका शारीरिक और मानसिक विकास नहीं हो पा रहा है। उनकी रचनात्मकता खत्म होती जा रही है और उनके सोचते की क्षमता पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। स्क्रीन टाइम बढ़ जाने के कारण बच्चों की नींद पूरी नहीं हो पा रही है जिसके कारण हृदय रोग तथा मधुमेह जैसी घातक बीमारियों के चंगुल में फंस रहे हैं। साइबर अपराधी भी जाल बिछाए बैठे हैं। बच्चे उनका भी शिकार हो रहे हैं। सोशल मीडिया के कारण एक काल्पनिक जगत में भटकने के लिए बच्चे ही नहीं नासमझ बड़े भी अभिशप्त हो गए हैं। इसके चलते नौनिहालों की पढ़ाई का तो बुरा हाल हो ही रहा है उनके पारिवारिक रिश्ते भी खतरे में पड़ रहे हैं। कहा जाता है कि हम जो देखते हैं सुनते हैं और पढ़ते हैं वही आगे चलकर बन जाते हैं। अब यह बताने की जरूरत नहीं है की इंटरनेट की खिड़की से क्या क्या हमारे बच्चों के सामने परोसा जा रहा है। हिंसा, अश्लीलता, नफरत और बेईमानी इसके मुख्य मुख्य विषय हैं । इन बुराइयों के साथ बड़े हो रहे बच्चे हमारे समाज के लिए कितने उपयोगी होंगे या समाज के लिए कितनी बड़ी चुनौती बनेंगे यह हमें जल्द ही पता चल जाएगा।


स्मार्टफोन की तमाम सारी बुराइयों के बावजूद इनमें कुछ ऐसी अच्छाइयां भी है जिसके कारण इस पर प्रतिबंध लगाया नहीं जा सकता। आज देश और दुनिया में जिस तेजी से प्रगति हो रही है उसके पीछे इस तकनीकी का बहुत बड़ा हाथ है। बच्चे लगातार माता-पिता के संपर्क में बने रहते हैं। शिक्षा से संबंधित किसी भी प्रश्न का जवाब अब उनकी उंगलियों पर होता है। कंप्यूटर का सारा काम मोबाइल कर रहा है। बैंकिंग हो खरीदारी हो या फिर टिकट की बुकिंग हो अथवा किसी सरकारी योजना के बारे में जानना या फार्म भरना हो तो वह स्मार्टफोन के जरिए बेहद आसानी से किया जा सकता है।


संसार की हर चीज की तरह स्मार्टफोन मे भी अच्छाइयां और बुराइयां दोनों है। यह उपयोगकर्ता पर निर्भर करता है कि वह इसका किस तरह से इस्तेमाल करता है। सरकार में बैठे नीति निर्धारक वर्ग और समाज के बुद्धिजीवी वर्ग की जिम्मेदारी है कि वह इस विषय पर कोई निश्चित दिशा निर्देश प्रस्तुत करें ताकि हमारे देश का भविष्य हमारे नौनिहाल इसका सही इस्तेमाल कर सकें।


 
 
 

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